The impact of 'Beti Bachao-Beti Padhao': In 10 villages of Kaithal, the num

‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ का असर: कैथल के 10 गांवों में बेटियों की संख्या लड़कों से अधिक

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The impact of 'Beti Bachao-Beti Padhao': In 10 villages of Kaithal, the num

कैथल जिले में ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ अभियान के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं। जिले के 10 गांवों ने लिंगानुपात के मामले में एक मिसाल पेश की है, जहां जन्म के समय बेटियों की संख्या लड़कों से अधिक दर्ज की गई है।


जागरूकता कार्यक्रम और सम्मान की योजना

स्वास्थ्य विभाग ने योजना बनाई है कि जिन 10 गांवों में बेटियों की संख्या में सुधार हुआ है, वहां विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के दौरान उन परिवारों और ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने लिंगानुपात सुधार में अहम भूमिका निभाई है।
प्रशासन का मानना है कि इससे अन्य गांवों को भी प्रेरणा मिलेगी और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव आएगा।


आशा वर्करों के साथ होगी बैठक

डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सचिन ने बताया कि जिले में लिंगानुपात बढ़ाने और घटाने वाले गांवों की सूची तैयार की गई है। इस विषय पर आशा वर्करों की बैठक बुलाई जाएगी, ताकि जमीनी स्तर पर निगरानी और जागरूकता को और मजबूत किया जा सके।


गिरावट वाले गांवों पर सख्ती

हालांकि जहां एक ओर 10 गांवों ने खुशी की खबर दी है, वहीं जिले के कुछ अन्य गांवों में लिंगानुपात में गिरावट भी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे 10 गांवों की पहचान की है, जहां स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन क्षेत्रों में कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराधों को रोकने के लिए निगरानी और सख्त की जाएगी। साथ ही अवैध लिंग जांच करने वाले केंद्रों पर छापेमारी की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।


प्रशासन की अपील

प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि बेटियों को समान अधिकार, शिक्षा और सम्मान दें तथा समाज से लिंग भेदभाव को समाप्त करने में सहयोग करें।